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Hanuman Ashtakam

हनुमान अष्टकम्

✦ Hanuman

Lyrics (Devanagari)

बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी विनती तब, छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन विचार बिचारो॥
कैद्रहु चाहिए कष्ट सहै, तुम्हरे बिनु कौन विचार विचारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बीर विचारो।
सिन्धु विलंघि सिया सुधि लाए, राम को काज कियो अति भारी॥
रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

... (हनुमान अष्टक — 8 पद्यों में हनुमान जी के पराक्रम और लीलाओं का वर्णन) ...

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

Meaning

This ashtakam, composed in a folk style similar to the Hanuman Chalisa, recounts key episodes of Hanuman's life — swallowing the sun as an infant, his exile due to a sage's curse, his search for Sita, and his role as "Sankatmochan" (remover of troubles).

When & Why It Is Recited

Recited alongside the Hanuman Chalisa on Tuesdays and Saturdays, especially by those in difficulty, seeking Hanuman's protective intervention.