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Vishnu Chalisa

विष्णु चालीसा

✦ Vishnu

Lyrics (Devanagari)

॥ दोहा ॥
विष्णु सुनाओ जगत सुख, गावत वेद पुराण।
शरणागत रक्षक सदा, कृपासिंधु भगवान॥

॥ चौपाई ॥
नमो विष्णु भगवान खरारी। कृपा करो गोविन्द मुरारी॥
तुम हो सब जग के आधारा। तुम बिन कौन करे निस्तारा॥

क्षीरसागर में शेष शय्या पर। सोवत हो कमला के प्रियवर॥
नाभि कमल से ब्रह्मा प्रगटे। सृष्टि रचना कारण सजते॥

दस अवतार धरे जग माहीं। मत्स्य कूर्म वाराह गणाहीं॥
नरसिंह वामन परशुराम। राम कृष्ण बौद्ध कल्कि नाम॥

हिरण्याक्ष कोउ मारयो धाई। धरणी उद्धार कीन्हो भाई॥
प्रह्लाद रक्षा हित नरहरि रूपा। धरयो अद्भुत अति भूपा॥

बलि को छल करि तीन पग नापा। त्रिभुवन नाप लियो निज आपा॥
परशुराम बनि छत्री मारे। इक्किस बार धरा जब टारे॥

राम रूप धरि रावण मारा। सीता हेतु किया रण भारा॥
कृष्ण रूप धरि कंस संहारा। गीता ज्ञान दियो जग सारा॥

बौद्ध रूप धरि धर्म प्रकाशा। अंत कल्कि धरि करिहौ नाशा॥
गरुड़ासन पर सोहत स्वामी। शंख चक्र गदा पद्म धामी॥

पीत वसन तन सुंदर सोहे। कोटि सूर्य सम तेज बिमोहे॥
लक्ष्मी संग विराजत स्वामी। भक्तन के हित अंतर्यामी॥

रक्षा कीन्हीं भक्त गजराजा। ग्राह त्रास हरि लीन्ह समाजा॥
द्रौपदी लाज बचाई तुम ही। चीर बढ़ाई राखी गरिमही॥

ध्रुव प्रह्लाद भरोसे तारे। नाम जपत सब संकट टारे॥
तुम सम कोउ न दानी दाता। सृष्टि पालन के विधाता॥

जो तुम्हरे गुण गावत नित हैं। तिनके सकल काज सिद्ध हैं॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ताकी सकल सिद्धि हो जाई॥

॥ दोहा ॥
सुमिरत विष्णु कृपानिधि, मिटत सकल संताप।
'भक्तिदास' शरणागति, हरहु जन्म के पाप॥

Meaning

This chalisa venerates Vishnu, the preserver of the universe, reclining on Shesha in the Kshira Sagar (ocean of milk), and recounts his Dashavatara — the ten incarnations from Matsya to Kalki — through which he protects dharma in every age.

When & Why It Is Recited

Recited on Thursdays and Ekadashi, and by devotees seeking protection, prosperity and liberation through surrender to Vishnu.