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Bhairav Chalisa

भैरव चालीसा

✦ Bhairav

Lyrics (Devanagari)

॥ दोहा ॥
जय काल भैरव देवता, शिव अवतार महान।
भक्तन के भय दूर करि, दो रक्षा वरदान॥

॥ चौपाई ॥
जय जय जय भैरव भयहारी। कृपा करहु अब मोहि उबारी॥
शिव स्वरूप भैरव अवतारा। महाकाल तुम भक्त उबारा॥

काल भैरव तुम काशी वासी। कोतवाल कहलाओ तुम्ह सुखरासी॥
श्वान वाहन तुम्हरो सोहे। खड्ग त्रिशूल हाथ में मोहे॥

काशी नगरी के तुम रखवारे। बिना दर्शन काशी दर्श न सारे॥
भूत प्रेत जब निकट न आवे। भैरव नाम जो कोई ध्यावे॥

तंत्र मंत्र के तुम अधिकारी। भय भ्रम नाशक कृपा तुम्हारी॥
भोग तुम्हारो उड़द रोटी। मदिरा शराब चढ़े या पूरी॥

रक्षक तुम प्रेत बाधा हारी। भक्तन के तुम प्राण पियारी॥
अष्ट भैरव जग में विख्याता। बटुक भैरव काल भैरव नाता॥

॥ दोहा ॥
भैरव चालीसा जो पढ़े, भय भ्रम होय विनाश।
रक्षा हो सब विपद से, पूरण हो सब आस॥

Meaning

This chalisa venerates Kaal Bhairav, the fierce form of Shiva who serves as guardian (Kotwal) of Kashi (Varanasi), rides a dog, wields a sword and trident, and protects devotees from fear, evil spirits and negative tantric influences.

When & Why It Is Recited

Recited on Sundays and during Bhairav Ashtami, especially by those seeking protection from fear, black magic or malevolent forces.