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Vaishno Devi Chalisa

वैष्णो देवी चालीसा

✦ Vaishno Devi

Lyrics (Devanagari)

॥ दोहा ॥
जय जय वैष्णो देवी माता, त्रिकुटा पर्वत वास।
भक्तन को दर्शन दियो, पूरण करो सब आस॥

॥ चौपाई ॥
जय जय वैष्णो जगत की माता। त्रिकुटा पर्वत तेरा गाता॥
महाकाली महालक्ष्मी रूपा। महासरस्वती तीन स्वरूपा॥

गुफा में करती वास तू न्यारी। पिंडी रूप में दरश तुम्हारी॥
कटरा नगर से यात्रा होई। भवन तुम्हारो दर्शन सोई॥

बाण गंगा में स्नान कराई। शुद्ध हृदय से भक्त सिधाई॥
अर्धकुंवारी में विश्राम किया। गर्भजून गुफा में तप किया॥

भैरों नाथ को पीछा कीना। तब त्रिशूल से मस्तक छीना॥
भैरों घाटी में शीश गिरायो। तुरत भैरों को मुक्ति दिलायो॥

पवन पुत्र हनुमान रखवारे। द्वार खड़े हैं भक्त सहारे॥
लंगर भंडारे नित्य लगावे। भक्तन को माता सुख दिखावे॥

नौ दिन नवरात्रि में पूजा होवे। लाखों भक्त दर्शन को आवे॥

॥ दोहा ॥
वैष्णो चालीसा भक्ति से, पढ़े जो श्रद्धा भाय।
माँ के दर्शन पायेंगे, मनवांछित फल पाय॥

Meaning

This chalisa venerates Mata Vaishno Devi, who resides on the Trikuta mountains near Katra, embodying Mahakali, Mahalakshmi and Mahasaraswati, and describes the sacred pilgrimage route through Banganga, Ardhkuwari and Bhairon Ghati to her cave shrine.

When & Why It Is Recited

Recited before and during the Vaishno Devi pilgrimage (yatra), and during Navratri, by devotees seeking the Mother's blessings and fulfillment of wishes.