Ram Chalisa

राम चालीसा

✦ Rama

Lyrics (Devanagari)

॥ दोहा ॥
श्री रघुनाथ कृपालु हैं, भक्तन हित अवतार।
सुमिरत सिद्धि होत सब, हरहु सकल संसार॥

॥ चौपाई ॥
जय राम सुखधाम सुशीला। शंकर मन भावन शुभ शीला॥
जय अवधेश दशरथ के जाये। मुनिवर सिद्ध सकल सुखदाये॥

जगत पिता जगदीश कहाओ। त्रिभुवन तुम्हरे गुण गाओ॥
भरत लखन शत्रुघन भ्राता। रघुकुल तिलक सबके सुखदाता॥

धनुष यज्ञ में सिय वर पायो। जनक सभा में जस अति छायो॥
परशुराम गर्व करि आये। तुमसे रण में हार खाये॥

पिता वचन तुम वन को धाये। सिय लखन सँग साथ निभाये॥
केवट प्रेम चरण धुलाये। चित्रकूट भरत मिलन कराये॥

पंचवटी में कुटी बनाई। सूर्पनखा को नाक कटाई॥
सीता हरण किया रावण ने। जटायु प्राण तजे रण करने॥

हनुमत मिलन सुग्रीव मिताई। बालि वध कर राज्य दिलाई॥
सेतु बांध लंका पर धाये। राम रावण घोर संग्राम मचाये॥

रावण मार सिया को पाई। अयोध्या पुनि लौट के आई॥
राज तिलक हो राम कहाये। रामराज्य में सुख सब पाये॥

तुम सम दानी कोउ नहिं दूजा। तुम सम त्यागी कोउ न पूजा॥
जो तुम्हरे गुण गावत नित हैं। तिनके सकल काज सिद्ध हैं॥

॥ दोहा ॥
राम चालीसा जो पढ़े, हृदय धरे विश्वास।
भव सागर से पार हो, पूरण होय सब आस॥

Meaning

This chalisa narrates the full story of Rama — his birth in Ayodhya, marriage to Sita, fourteen years of exile, the abduction of Sita by Ravana, his alliance with Hanuman and Sugriva, the war in Lanka, and his triumphant return as the ideal king (Ram Rajya).

When & Why It Is Recited

Recited during Ram Navami, Diwali, and daily by devotees seeking righteousness, courage and the removal of hardship through faith in Rama.