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Krishna Chalisa

कृष्ण चालीसा

✦ Krishna

Lyrics (Devanagari)

॥ दोहा ॥
बंशी शोभित कर मधुर, नंद लला महाराज।
जय यशोदा के प्रान धन, राखो मेरी लाज॥

॥ चौपाई ॥
जय यदुनंदन जय जगवंदन। जय वसुदेव देवकी नंदन॥
जय यशोदा सुत नंद दुलारे। जय प्रभु भक्तन के रखवारे॥

पीताम्बर तन कुंज बिहारी। नंद के लाला गिरधर मुरारी॥
मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल। अरुण अधर सोहे धुनि मंगल॥

कर में मुरली अधर विराजे। छवि देखत बहु दुःख भाजे॥
गोपिन संग रास रचावें। सुर मुनि सब मन मोहित पावें॥

कालिय दह में कूद के पैठे। कालिय नाग शीश पर नैठे॥
गोवर्धन गिरि लियो उठाई। इंद्र क्रोध से लियो बचाई॥

पूतना कंस दुष्ट संहारे। कंस मामा को नाश करारे॥
मथुरा गोकुल द्वारका वासी। बाल सखा सुदामा के दासी॥

गीता ज्ञान अर्जुन को दीना। भगवद रूप विराट दिखीना॥
कर्म योग भक्ति उपदेशा। जग को दियो अमर संदेशा॥

द्रौपदी की लाज बचाई। सुदर्शन चक्र चलाई भाई॥
राधा संग प्रेम अनूपा। नाम अमर है श्याम सरूपा॥

जो नर तुम्हरो ध्यान लगावे। सो निश्चय भव पार हो जावे॥
सुमिरन करत कृष्ण सुखदाई। पल में हरे सकल दुखदाई॥

॥ दोहा ॥
कृष्ण चालीसा जो पढ़े, प्रेम सहित सुख पाय।
गोपाल कृपा करहु सदा, चरणन शीश नवाय॥

Meaning

This chalisa celebrates Krishna's life — from his birth to Devaki and Vasudeva, his childhood in Gokul and Vrindavan (lifting Govardhan hill, subduing the Kaliya serpent), his friendship with Sudama, protecting Draupadi, and imparting the Bhagavad Gita to Arjuna.

When & Why It Is Recited

Recited daily by Krishna devotees, especially on Janmashtami and Wednesdays, seeking his protection and divine love (prema-bhakti).