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Saraswati Chalisa

सरस्वती चालीसा

✦ Saraswati

Lyrics (Devanagari)

॥ दोहा ॥
जय शारदे बुद्धि प्रदायिनी, ज्ञान विवेक विधान।
वर दो मातु सरस्वती, बनूं सुयश की खान॥

॥ चौपाई ॥
जय जय जय जगदम्ब भवानी। ज्ञान बुद्धि विद्या की खानी॥
चंद्रवदनी वीणापाणी। स्फटिक माल हंस विमानी॥

पुस्तक धारिणी ज्ञान प्रकाशा। सद्गुण सद्बुद्धि की आशा॥
कमल आसन विराजे माता। श्वेत वसन उर मुक्ता दाता॥

तुम बिन ज्ञान न पावे कोई। तुम बिन विद्या मिले न सोई॥
जड़ मति जन तुम्हरे गुण गावें। बुद्धि विवेक अचानक पावें॥

काली दुर्गा तुम्हरे रूपा। ब्रह्मा विष्णु शिव तुम्हरे भूपा॥
सुर नर मुनि सब ध्यान लगावें। शारद शारद नित्य कहावें॥

मूढ़ अजान बुद्धि के हीना। तुम्हरे ध्यान से ज्ञानी कीना॥
बालक जो विद्यारंभ करावें। तुम्हरो नाम प्रथम ही गावें॥

बसंत पंचमी पूजा होवे। तुम्हरे भक्त हर संकट खोवे॥
कण्ठ मयूर विराजत रानी। विद्या दायक तुम्हीं भवानी॥

॥ दोहा ॥
मातु सरस्वती चालीसा, पढ़े सुने चित लाय।
बुद्धि विद्या विवेक धन, ताको मिले सदाय॥

Meaning

This chalisa venerates Saraswati as the source of all knowledge, wisdom and the arts — seated on a lotus, holding a veena and book, riding a swan, and invoked at the beginning of a child's education and during Basant Panchami.

When & Why It Is Recited

Recited before exams, at the start of learning, on Basant Panchami, and by students, writers, musicians and artists seeking clarity and skill.