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Ekadashi Vrat Katha

एकादशी व्रत कथा

✦ Vishnu

Katha (Story)

प्राचीन काल में मुरा नामक एक अत्यंत बलशाली दैत्य था, जिसने देवताओं को हराकर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया। इंद्र सहित सभी देवता व्याकुल होकर भगवान विष्णु की शरण में गए और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने मुरासुर से युद्ध किया, परंतु दैत्य बहुत बलशाली था। युद्ध करते-करते भगवान विष्णु थक गए और बद्रिकाश्रम की एक गुफा (सिंहावती गुफा) में विश्राम करने चले गए।

मुरासुर ने अवसर पाकर भगवान विष्णु पर आक्रमण करने का प्रयास किया। तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई, जिसने अपने अलौकिक बल से मुरासुर का वध कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस कन्या से वर मांगने को कहा। कन्या ने कहा कि जिस तिथि पर उसका प्राकट्य हुआ है, उस तिथि को उसके नाम "एकादशी" से जाना जाए और जो कोई भी इस दिन उपवास करे, उसे सभी पापों से मुक्ति मिले।

भगवान विष्णु ने उसे यह वरदान दिया और एकादशी को अपनी अत्यंत प्रिय तिथि घोषित किया। तभी से प्रत्येक माह की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।

Significance

This katha explains the origin of the Ekadashi fast: a divine maiden (Ekadashi Devi) emerged from Vishnu's own body to destroy the demon Muraasura while Vishnu rested, and in gratitude Vishnu declared her tithi (the 11th lunar day) most sacred, granting liberation from sin to all who observe a fast on it.

How the Vrat Is Observed

Ekadashi occurs twice a month (Shukla and Krishna Paksha) and is observed with a full or partial fast (often avoiding grains), worship of Vishnu, and staying awake in devotion (jagran). It is believed to purify the mind, control desires and bring the devotee closer to moksha.