Katha (Story)
एक साहूकार की सात बेटियाँ और एक बेटा था। सभी बहनों ने अपने भाई के साथ करवा चौथ का व्रत रखा। दिनभर भूखी-प्यासी बहनों को देखकर भाई से रहा नहीं गया, और शाम को उसने एक पीपल के पेड़ की आड़ में दीया जलाकर छलनी से दिखा दिया, यह कहते हुए कि चाँद निकल आया है। छोटी बहन ने बिना जांचे व्रत खोल लिया, जबकि यह असली चाँद नहीं था। व्रत तोड़ते ही उसके पति की मृत्यु का समाचार आया। बहन शोक में डूब गई, तब उसकी भाभी और देवी पार्वती ने उसे बताया कि उसने विधिपूर्वक व्रत नहीं निभाया, इसलिए यह विपत्ति आई। देवी पार्वती के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से उस स्त्री ने अगले वर्ष पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रखा, चाँद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला। उसकी सच्ची भक्ति और तप से प्रसन्न होकर देवी पार्वती ने उसके पति को पुनः जीवित कर दिया। इसी कथा से यह सीख मिलती है कि करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा और सही विधि से रखने पर ही फलदायी होता है।
Significance
This katha teaches that the Karva Chauth fast must be observed strictly according to tradition — breaking the fast only after sighting the actual moon — as a demonstration of unwavering devotion and patience for the well-being of one's husband.
How the Vrat Is Observed
Married women observe a dawn-to-moonrise fast without food or water, worship Gauri Mata and Shiva, and break the fast after viewing the moon through a sieve and then their husband's face, praying for his long life and prosperity.