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Ganesh Chaturthi Vrat Katha

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

✦ Ganesha

Katha (Story)

देवी पार्वती ने स्नान के समय अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपने द्वार का रक्षक नियुक्त किया, यह आज्ञा देकर कि किसी को भी अंदर न आने दे। जब भगवान शिव लौटे और बालक ने उन्हें रोका, तो क्रोधित शिव जी ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया। यह जानकर देवी पार्वती अत्यंत दुखी और क्रोधित हुईं।

देवी को शांत करने के लिए भगवान शिव ने आदेश दिया कि जो भी प्राणी सबसे पहले उत्तर दिशा में मिले, उसका सिर लाकर बालक के धड़ पर लगाया जाए। सैनिकों को एक हाथी मिला, जिसका सिर लाकर बालक को जीवित किया गया। इस प्रकार गजानन (हाथी के मुख वाले) गणेश का जन्म हुआ, और भगवान शिव ने उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने तथा विघ्नहर्ता होने का वरदान दिया।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन इसी घटना की स्मृति में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, और दस दिनों तक गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है।

Significance

This katha of Ganesha's birth from Parvati, his beheading by an unwitting Shiva, and his restoration with an elephant head — becoming Vighnaharta and the deity worshipped first — forms the basis of Ganesh Chaturthi.

How the Vrat Is Observed

Observed over ten days with the installation and worship of a Ganesha idol at home or in public pandals, offerings of modak, and concluding with Ganesh Visarjan (immersion) on Anant Chaturdashi.