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Janmashtami Vrat Katha

जन्माष्टमी व्रत कथा

✦ Krishna

Katha (Story)

मथुरा के राजा कंस अत्यंत अत्याचारी था। आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी। भयभीत कंस ने देवकी और उसके पति वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी एक-एक कर सभी संतानों की हत्या कर दी।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को, रोहिणी नक्षत्र में, देवकी के गर्भ से स्वयं भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में जन्म लिया। उसी रात्रि चमत्कार से कारागार के द्वार खुल गए, पहरेदार सो गए, और वसुदेव जी भगवान कृष्ण को यमुना पार गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आए, तथा वहां जन्मी कन्या को देवकी के पास ले आए। इस प्रकार भगवान कृष्ण कंस के हाथों से सुरक्षित बच गए और आगे चलकर उन्होंने कंस का वध कर धरती को अत्याचार से मुक्त किया।

इसी रात्रि की स्मृति में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है, जिसमें भक्त निर्जला व्रत रखकर अर्धरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं।

Significance

This katha of Krishna's miraculous birth to Devaki and Vasudeva at midnight, and his secret transfer to safety in Gokul to escape the tyrant Kansa, forms the basis of the Janmashtami celebration.

How the Vrat Is Observed

Observed with a strict fast until midnight, devotional singing, and the ceremonial bathing and cradling of the baby Krishna idol at the moment of his believed birth, followed by breaking the fast with prasad.