Katha (Story)
एक निर्धन ब्राह्मणी प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा करती और मंगलवार का व्रत रखती थी। एक बार वह मंदिर के लिए भोग बनाने की सामग्री लाना भूल गई और पीड़ा में रोने लगी। हनुमान जी स्वयं एक बालक का रूप धारण कर उसके घर आए और भोग तैयार करवा कर स्वयं ग्रहण भी किया, फिर अंतर्ध्यान हो गए। अगले दिन जब ब्राह्मणी मंदिर पहुंची तो पुजारी ने बताया कि हनुमान जी की मूर्ति के मुख पर भोग के निशान हैं, और स्वप्न में हनुमान जी ने उसे बताया कि उन्होंने स्वयं बालक रूप में उसका भोग ग्रहण किया था। इस चमत्कार से ब्राह्मणी की दरिद्रता दूर हो गई और उसका परिवार सुखी-संपन्न हो गया। इसी कथा के आधार पर मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखने की परंपरा है, जिससे भक्तों के संकट दूर होते हैं और साहस-बल की प्राप्ति होती है।
Significance
This katha of a poor Brahmin woman whose sincere Tuesday devotion to Hanuman was rewarded by his miraculous personal acceptance of her offering (in the form of a child) illustrates how the Tuesday fast for Hanuman removes poverty and hardship for devoted worshippers.
How the Vrat Is Observed
Observed every Tuesday with a fast, recitation of the Hanuman Chalisa, and offering of sindoor and til (sesame) oil at Hanuman temples — believed to grant courage, protection and removal of Mangal Dosha-related obstacles.