Katha (Story)
अयोध्या के राजा दशरथ को दीर्घकाल तक कोई संतान नहीं हुई। महर्षि वशिष्ठ के परामर्श पर उन्होंने ऋषि श्रृंगी से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ के फलस्वरूप अग्निदेव प्रकट हुए और उन्होंने राजा को खीर से भरा पात्र दिया, जिसे राजा ने अपनी तीनों रानियों — कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांट दिया। चैत्र शुक्ल नवमी के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में, कौशल्या के गर्भ से स्वयं भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया, ताकि रावण जैसे अत्याचारी असुर का वध कर पृथ्वी को धर्म की स्थापना दिला सकें। साथ ही कैकेयी से भरत-शत्रुघ्न और सुमित्रा से लक्ष्मण का भी जन्म हुआ। इसी दिन की स्मृति में राम नवमी का पर्व मनाया जाता है, जिसमें भक्त व्रत रखकर श्रीराम के जन्मोत्सव में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
Significance
This katha narrates the birth of Lord Rama to King Dashratha and Queen Kaushalya through the Putrakameshti Yajna, as an incarnation of Vishnu sent to destroy the tyrant Ravana and restore dharma — the basis of the Ram Navami celebration.
How the Vrat Is Observed
Observed with a day-long fast, Ramayana recitation, bhajans and temple visits, culminating in celebrations at midday (Rama's believed birth time), invoking righteousness and protection.