Katha (Story)
देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अनेक जन्मों तक कठोर तपस्या की। एक जन्म में उनके पिता हिमालय ने विष्णु भगवान से उनका विवाह तय कर दिया, परंतु पार्वती अपने मन में केवल शिव को ही पति मानती थीं। उन्होंने अपनी सखी के माध्यम से घर से भागकर वन में जाकर कठोर तप किया — निराहार रहकर, कभी पत्ते खाकर तो कभी पूर्ण उपवास करके। उनकी अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पत्नी रूप में स्वीकार किया। भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन (हरियाली तीज) उनका विवाह संपन्न हुआ माना जाता है। इसी स्मृति में स्त्रियां हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज के अवसर पर निर्जला व्रत रखकर देवी पार्वती की भांति अपने पति की दीर्घायु व सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
Significance
This katha recounts Parvati's intense penance across lifetimes to win Shiva as her husband despite her father's wish to marry her to Vishnu, culminating in Shiva accepting her devotion — the origin of the Teej fasting tradition observed by women for marital happiness.
How the Vrat Is Observed
Observed as Hariyali Teej, Kajari Teej or Hartalika Teej (regional variations) with a strict fast, songs, swings, green attire, and worship of Shiva-Parvati for a happy married life or, for unmarried women, a good life partner.